Yaado ka Pitara

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Aaj kuch naya sa shayd dhundh raha tha me.

Kuch apne khali waqt me  naya waqt dhundh raha tha me

Thoda waqt gujra to purani yaado ka pitara gir gya.

Use  uthaya to bhul gaya kya dhund raha tha me.

यादों का पिटारा।

आज कुछ नया से शायद ढूंढ रहा था में।


कुछ अपने खाली वक़्त में नया वक़्त ढूंढ रहा था में


थोड़ा  वक्त गुजर तो पुरानी यादों का पिटारा गिर गया।


उसे उठाया तो भूल गया क्या ढूंढ रहा था ने।

Kashtee-By Imran khan

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