मुद्दतो बाहर की जिंदगी बिताई है। आज घर रहकर अपनो से फिर मोहब्बत पाई है। कुछ दूरिया ही सही अपने घरों में करना पड़ी। फिर भी मोहब्बत में कोई कमी न आयी है। वीरान सा पड़ा है राजबाड़ा आज। खामोशी सराफे में छाई है। हर कोई आज खोफ में है। इस तरह बीमारी ने अपनी जड़े फैलाई है।