मेरे सब्र का ना ले इम्तेहान।

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मेरे सब्र का ना ले इम्तेहान।

मेरी ख़ामोशियो को सहारा न दे।

जिसे ढूंढे ये निगाहे ।

उन निगाहों को किनारे न दे।

जरा तकलीफ तो होगी उसे समजाने में।

जरा मोहब्बत भी होगी उसे मनाने में।दे

छोड़ दे उसकी खामोशियो से खेलना ।

कही रोती आंखों को इशारा न दे।

जो तेरे बगेर जी ना सके ।

उसे जीने की दुआ न दे।

मेरी खामोशियो को तू सहारा न दे…….2

Kashtee-By Imran khan

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